जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर बैंक के दो अधिकारियों के खिलाफ जारी समन को रद कर दिया है। बैंक अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत में कार्रवाई करते हुए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राजौरी ने समन जारी किए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने बिना न्यायिक जांच किए ये समन जारी किए।
हाईकोर्ट ने कोटरंका शाखा के तत्कालीन प्रबंधक जसमीत सिंह और राजौरी के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रमुख मोहम्मद शफी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिए। दोनों ने 27 अक्टूबर 2018 के ट्रायल कोर्ट के समन आदेश को चुनौती दी थी।
उनके खिलाफ दर्ज शिकायत में आरोप लगाया था कि बैंक के एक अधिकारी ने नौकरी दिलाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 2.50 लाख लिए और बाद में दोनों अधिकारियों ने उसे धमकाया व अपशब्द कहे। इस आधार पर ट्रायल कोर्ट ने प्रारंभिक बयान दर्ज कर समन जारी किया था।
हाईकोर्ट ने शिकायत में गंभीर कमियां पाईं। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने कथित भुगतान की तारीख, समय और स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया और यह भी नहीं बताया कि एक अधिकारी दूसरे के निर्देश पर कैसे कार्य कर रहा था।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपित को आपराधिक मामले में समन करना गंभीर प्रक्रिया है। मजिस्ट्रेट को आदेश जारी करने से पहले शिकायत और साक्ष्यों की जांच करनी चाहिए। समन रद कर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिकायत को निरस्त नहीं किया है और मामले को दोबारा विचार के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया गया है।
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